Vo koi achchhe dino ka dost tha.

 मैं नहीं गुजरूंगा बदनाम गलियों से,

बदनाम होने के लिए।

मेरा एक इश्क़ ही काफ़ी होगा,

जहां में बदनाम होने के लिए।। विनय कुमार झा 


मैंने कब कहा की कीमत समझो मेरी..

अगर मुझे बिकना होता..

आज यू तन्हा न होता.....



गुजरता है मेरा वक्त मगर मगर ख्वाहिशें पूरी नहीं होती ||

चलता हूं राहों पे दिन रात मगर कम यह दूरी नहीं होती ||


मंजिल की तलाश में हूं यारो सफ़र पर तन्हा निकला हूं ||

जब सिद्दत से चाहा है, कहते हैं ज़िद्द अधूरी नहीं होती ||

Vinay kumar jha 


वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का

जो पिछली रात से याद आ रहा है l 

- नासिर काज़मी

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